ग्रंथऋग्वेदमण्डल 5सूक्त 6868.2ऋग्वेद 68.2स॒म्राजा॒ या घृ॒तयो॑नी मि॒त्रश्चो॒भा वरु॑णश्च । दे॒वा दे॒वेषु॑ प्रश॒स्ता ॥२॥पिछलाअगलापूरा अध्याय