ग्रंथऋग्वेदमण्डल 5सूक्त 6565.2ऋग्वेद 65.2ता हि श्रेष्ठ॑वर्चसा॒ राजा॑ना दीर्घ॒श्रुत्त॑मा । ता सत्प॑ती ऋता॒वृध॑ ऋ॒तावा॑ना॒ जने॑जने ॥२॥पिछलाअगलापूरा अध्याय