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ऋग्वेद 53.4

ये अ॒ञ्जिषु॒ ये वाशी॑षु॒ स्वभा॑नवः स्र॒क्षु रु॒क्मेषु॑ खा॒दिषु॑ ।
श्रा॒या रथे॑षु॒ धन्व॑सु ॥४॥

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