ग्रंथऋग्वेदमण्डल 5सूक्त 5252.4ऋग्वेद 52.4म॒रुत्सु॑ वो दधीमहि॒ स्तोमं॑ य॒ज्ञं च॑ धृष्णु॒या । विश्वे॒ ये मानु॑षा यु॒गा पान्ति॒ मर्त्यं॑ रि॒षः ॥४॥पिछलाअगलापूरा अध्याय