Utshovऐप डाउनलोड करें

ऋग्वेद 52.17

स॒प्त मे॑ स॒प्त शा॒किन॒ एक॑मेका श॒ता द॑दुः ।
य॒मुना॑या॒मधि॑ श्रु॒तमुद् राधो॒ गव्यं॑ मृजे॒ नि राधो॒ अश्व्यं॑ मृजे ॥१७॥

पूरा अध्याय