ग्रंथऋग्वेदमण्डल 5सूक्त 5252.15ऋग्वेद 52.15नू म॑न्वा॒न ए॑षां दे॒वाँ अच्छा॒ न व॒क्षणा॑ । दा॒ना स॑चेत सू॒रिभि॒र्याम॑श्रुतेभिर॒ञ्जिभि॑ः ॥१५॥पिछलाअगलापूरा अध्याय