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ऋग्वेद 51.8

स॒जूर्विश्वे॑भिर्दे॒वेभि॑र॒श्विभ्या॑मु॒षसा॑ स॒जूः । आ या॑ह्यग्ने अत्रि॒वत् सु॒ते र॑ण ॥८॥

पूरा अध्याय