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ऋग्वेद 50.4

यत्र॒ वह्नि॑र॒भिहि॑तो दु॒द्रव॒द् द्रोण्य॑ः प॒शुः ।
नृ॒मणा॑ वी॒रप॒स्त्योऽर्णा॒ धीरे॑व॒ सनि॑ता ॥४॥

पूरा अध्याय