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ऋग्वेद 41.12

शृ॒णोतु॑ न ऊ॒र्जां पति॒र्गिर॒ः स नभ॒स्तरी॑याँ इषि॒रः परि॑ज्मा ।
शृ॒ण्वन्त्वाप॒ः पुरो॒ न शु॒भ्राः परि॒ स्रुचो॑ बबृहा॒णस्याद्रे॑ः ॥१२॥

पूरा अध्याय