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ऋग्वेद 41.10

वृष्णो॑ अस्तोषि भू॒म्यस्य॒ गर्भं॑ त्रि॒तो नपा॑तम॒पां सु॑वृ॒क्ति ।
गृ॒णी॒ते अ॒ग्निरे॒तरी॒ न शू॒षैः शो॒चिष्के॑शो॒ नि रि॑णाति॒ वना॑ ॥१०॥

पूरा अध्याय