ग्रंथऋग्वेदमण्डल 5सूक्त 3535.8ऋग्वेद 35.8अ॒स्माक॑मि॒न्द्रेहि॑ नो॒ रथ॑मवा॒ पुरं॑ध्या । व॒यं श॑विष्ठ॒ वार्यं॑ दि॒वि श्रवो॑ दधीमहि दि॒वि स्तोमं॑ मनामहे ॥८॥पिछलापूरा अध्याय