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ऋग्वेद 32.9

को अ॑स्य॒ शुष्मं॒ तवि॑षीं वरात॒ एको॒ धना॑ भरते॒ अप्र॑तीतः ।
इ॒मे चि॑दस्य॒ ज्रय॑सो॒ नु दे॒वी इन्द्र॒स्यौज॑सो भि॒यसा॑ जिहाते ॥९॥

पूरा अध्याय