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ऋग्वेद 28.1

समि॑द्धो अ॒ग्निर्दि॒वि शो॒चिर॑श्रेत् प्र॒त्यङ्ङु॒षस॑मुर्वि॒या वि भा॑ति ।
एति॒ प्राची॑ वि॒श्ववा॑रा॒ नमो॑भिर्दे॒वाँ ईळा॑ना ह॒विषा॑ घृ॒ताची॑ ॥१॥

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