ग्रंथऋग्वेदमण्डल 5सूक्त 2626.2ऋग्वेद 26.2तं त्वा॑ घृतस्नवीमहे॒ चित्र॑भानो स्व॒र्दृश॑म् । दे॒वाँ आ वी॒तये॑ वह ॥२॥पिछलाअगलापूरा अध्याय