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ऋग्वेद 22.1

प्र वि॑श्वसामन्नत्रि॒वदर्चा॑ पाव॒कशो॑चिषे । यो अ॑ध्व॒रेष्वीड्यो॒ होता॑ म॒न्द्रत॑मो वि॒शि ॥१॥

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