ग्रंथऋग्वेदमण्डल 5सूक्त 1313.3ऋग्वेद 13.3अ॒ग्निर्जु॑षत नो॒ गिरो॒ होता॒ यो मानु॑षे॒ष्वा । स य॑क्ष॒द् दैव्यं॒ जन॑म् ॥३॥पिछलाअगलापूरा अध्याय