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ऋग्वेद 57.1

क्षेत्र॑स्य॒ पति॑ना व॒यं हि॒तेने॑व जयामसि ।
गामश्वं॑ पोषयि॒त्न्वा स नो॑ मृळाती॒दृशे॑ ॥१॥

पूरा अध्याय