ग्रंथऋग्वेदमण्डल 4सूक्त 5656.5ऋग्वेद 56.5प्र वां॒ महि॒ द्यवी॑ अ॒भ्युप॑स्तुतिं भरामहे । शुची॒ उप॒ प्रश॑स्तये ॥५॥पिछलाअगलापूरा अध्याय