ग्रंथऋग्वेदमण्डल 4सूक्त 5252.3ऋग्वेद 52.3उ॒त सखा॑स्य॒श्विनो॑रु॒त मा॒ता गवा॑मसि । उ॒तोषो॒ वस्व॑ ईशिषे ॥३॥पिछलाअगलापूरा अध्याय