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ऋग्वेद 5.15

अ॒स्य श्रि॒ये स॑मिधा॒नस्य॒ वृष्णो॒ वसो॒रनी॑कं॒ दम॒ आ रु॑रोच ।
रुश॒द् वसा॑नः सु॒दृशी॑करूपः क्षि॒तिर्न रा॒या पु॑रु॒वारो॑ अद्यौत् ॥१५॥

पूरा अध्याय