ग्रंथऋग्वेदमण्डल 4सूक्त 4747.3ऋग्वेद 47.3वाय॒विन्द्र॑श्च शु॒ष्मिणा॑ स॒रथं॑ शवसस्पती । नि॒युत्व॑न्ता न ऊ॒तय॒ आ या॑तं॒ सोम॑पीतये ॥३॥पिछलाअगलापूरा अध्याय