Utshovऐप डाउनलोड करें

ऋग्वेद 32.2

भृमि॑श्चिद् घासि॒ तूतु॑जि॒रा चि॑त्र चि॒त्रिणी॒ष्वा । चि॒त्रं कृ॑णोष्यू॒तये॑ ॥२॥

पूरा अध्याय