ग्रंथऋग्वेदमण्डल 4सूक्त 3232.10ऋग्वेद 32.10प्र ते॑ वोचाम वी॒र्या॒३ या म॑न्दसा॒न आरु॑जः । पुरो॒ दासी॑र॒भीत्य॑ ॥१०॥पिछलाअगलापूरा अध्याय