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ऋग्वेद 27.2

न घा॒ स मामप॒ जोषं॑ जभारा॒ऽभीमा॑स॒ त्वक्ष॑सा वी॒र्ये॑ण ।
ई॒र्मा पुरं॑धिरजहा॒दरा॑तीरु॒त वाताँ॑ अतर॒च्छूशु॑वानः ॥२॥

पूरा अध्याय