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ऋग्वेद 23.11

नू ष्टु॒त इ॑न्द्र॒ नू गृ॑णा॒न इषं॑ जरि॒त्रे न॒द्यो॒३ न पी॑पेः ।
अका॑रि ते हरिवो॒ ब्रह्म॒ नव्यं॑ धि॒या स्या॑म र॒थ्य॑ः सदा॒साः ॥११॥

पूरा अध्याय