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ऋग्वेद 21.9

भ॒द्रा ते॒ हस्ता॒ सुकृ॑तो॒त पा॒णी प्र॑य॒न्तारा॑ स्तुव॒ते राध॑ इन्द्र ।
का ते॒ निष॑त्ति॒ः किमु॒ नो म॑मत्सि॒ किं नोदु॑दु हर्षसे॒ दात॒वा उ॑ ॥९॥

पूरा अध्याय