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ऋग्वेद 9.6

तं त्वा॒ मर्ता॑ अगृभ्णत दे॒वेभ्यो॑ हव्यवाहन ।
विश्वा॒न् यद् य॒ज्ञाँ अ॑भि॒पासि॑ मानुष॒ तव॒ क्रत्वा॑ यविष्ठ्य ॥६॥

पूरा अध्याय