ग्रंथऋग्वेदमण्डल 3सूक्त 6262.16ऋग्वेद 62.16आ नो॑ मित्रावरुणा घृ॒तैर्गव्यू॑तिमुक्षतम् । मध्वा॒ रजां॑सि सुक्रतू ॥१६॥पिछलाअगलापूरा अध्याय