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ऋग्वेद 58.8

अश्वि॑ना॒ परि॑ वा॒मिष॑ः पुरू॒चीरी॒युर्गी॒र्भिर्यत॑माना॒ अमृ॑ध्राः ।
रथो॑ ह वामृत॒जा अद्रि॑जूत॒ः परि॒ द्यावा॑पृथि॒वी या॑ति स॒द्यः ॥८॥

पूरा अध्याय