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ऋग्वेद 55.7

द्वि॒मा॒ता होता॑ वि॒दथे॑षु स॒म्राळन्वग्रं॒ चर॑ति॒ क्षेति॑ बु॒ध्नः ।
प्र रण्या॑नि रण्य॒वाचो॑ भरन्ते म॒हद् दे॒वाना॑मसुर॒त्वमेक॑म् ॥७॥

पूरा अध्याय