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ऋग्वेद 55.21

इ॒मां च॑ नः पृथि॒वीं वि॒श्वधा॑या॒ उप॑ क्षेति हि॒तमि॑त्रो॒ न राजा॑ ।
पु॒र॒ःसद॑ः शर्म॒सदो॒ न वी॒रा म॒हद् दे॒वाना॑मसुर॒त्वमेक॑म् ॥२१॥

पूरा अध्याय