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ऋग्वेद 54.22

स्वद॑स्व ह॒व्या समिषो॑ दिदीह्यस्म॒द्र्य१क् सं मि॑मीहि॒ श्रवां॑सि ।
विश्वाँ॑ अग्ने पृ॒त्सु ताञ्जे॑षि॒ शत्रू॒नहा॒ विश्वा॑ सु॒मना॑ दीदिही नः ॥२२॥

पूरा अध्याय