Utshovऐप डाउनलोड करें

ऋग्वेद 50.2

आ ते॑ सप॒र्यू ज॒वसे॑ युनज्मि॒ ययो॒रनु॑ प्र॒दिव॑ः श्रु॒ष्टिमाव॑ः ।
इ॒ह त्वा॑ धेयु॒र्हर॑यः सुशिप्र॒ पिबा॒ त्व१स्य सुषु॑तस्य॒ चारो॑ः ॥२॥

पूरा अध्याय