Utshovऐप डाउनलोड करें

ऋग्वेद 45.4

आ न॒स्तुजं॑ र॒यिं भ॒रांशं॒ न प्र॑तिजान॒ते ।
वृ॒क्षं प॒क्वं फल॑म॒ङ्कीव॑ धूनु॒हीन्द्र॑ स॒म्पार॑णं॒ वसु॑ ॥४॥

पूरा अध्याय