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ऋग्वेद 43.1

आ या॑ह्य॒र्वाङुप॑ वन्धुरे॒ष्ठास्तवेदनु॑ प्र॒दिव॑ः सोम॒पेय॑म् ।
प्रि॒या सखा॑या॒ वि मु॒चोप॑ ब॒र्हिस्त्वामि॒मे ह॑व्य॒वाहो॑ हवन्ते ॥१॥

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