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ऋग्वेद 4.1

स॒मित्स॑मित् सु॒मना॑ बोध्य॒स्मे शु॒चाशु॑चा सुम॒तिं रा॑सि॒ वस्व॑ः ।
आ दे॑व दे॒वान् य॒जथा॑य वक्षि॒ सखा॒ सखी॑न् त्सु॒मना॑ यक्ष्यग्ने ॥१॥

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