Utshovऐप डाउनलोड करें

ऋग्वेद 39.1

इन्द्रं॑ म॒तिर्हृ॒द आ व॒च्यमा॒ना ऽच्छा॒ पतिं॒ स्तोम॑तष्टा जिगाति ।
या जागृ॑विर्वि॒दथे॑ श॒स्यमा॒नेन्द्र॒ यत्ते॒ जाय॑ते वि॒द्धि तस्य॑ ॥१॥

पूरा अध्याय