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ऋग्वेद 30.11

एको॒ द्वे वसु॑मती समी॒ची इन्द्र॒ आ प॑प्रौ पृथि॒वीमु॒त द्याम् ।
उ॒तान्तरि॑क्षाद॒भि न॑ः समी॒क इ॒षो र॒थीः स॒युज॑ः शूर॒ वाजा॑न् ॥११॥

पूरा अध्याय