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ऋग्वेद 25.1

अग्ने॑ दि॒वः सू॒नुर॑सि॒ प्रचे॑ता॒स्तना॑ पृथि॒व्या उ॒त वि॒श्ववे॑दाः ।
ऋध॑ग्दे॒वाँ इ॒ह य॑जा चिकित्वः ॥१॥

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