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ऋग्वेद 13.4

स न॒ः शर्मा॑णि वी॒तये॒ऽग्निर्य॑च्छतु॒ शंत॑मा ।
यतो॑ नः प्रु॒ष्णव॒द् वसु॑ दि॒वि क्षि॒तिभ्यो॑ अ॒प्स्वा ॥४॥

पूरा अध्याय