ग्रंथऋग्वेदमण्डल 3सूक्त 1212.5ऋग्वेद 12.5प्र वा॑मर्चन्त्यु॒क्थिनो॑ नीथा॒विदो॑ जरि॒तार॑ः । इन्द्रा॑ग्नी॒ इष॒ आ वृ॑णे ॥५॥पिछलाअगलापूरा अध्याय