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ऋग्वेद 10.5

प्र होत्रे॑ पू॒र्व्यं वचो॒ऽग्नये॑ भरता बृ॒हत् । वि॒पां ज्योतीं॑षि॒ बिभ्र॑ते॒ न वे॒धसे॑ ॥५॥

पूरा अध्याय