ग्रंथऋग्वेदमण्डल 2सूक्त 77.3ऋग्वेद 7.3विश्वा॑ उ॒त त्वया॑ व॒यं धारा॑ उद॒न्या॑ इव । अति॑ गाहेमहि॒ द्विष॑ः ॥३॥पिछलाअगलापूरा अध्याय