ग्रंथऋग्वेदमण्डल 2सूक्त 4141.3ऋग्वेद 41.3शु॒क्रस्या॒द्य गवा॑शिर॒ इन्द्र॑वायू नि॒युत्व॑तः । आ या॑तं॒ पिब॑तं नरा ॥३॥पिछलाअगलापूरा अध्याय