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ऋग्वेद 35.1

उपे॑मसृक्षि वाज॒युर्व॑च॒स्यां चनो॑ दधीत ना॒द्यो गिरो॑ मे ।
अ॒पां नपा॑दाशु॒हेमा॑ कु॒वित् स सु॒पेश॑सस्करति॒ जोषि॑ष॒द्धि ॥१॥

पूरा अध्याय