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ऋग्वेद 33.15

ए॒वा ब॑भ्रो वृषभ चेकितान॒ यथा॑ देव॒ न हृ॑णी॒षे न हंसि॑ ।
ह॒व॒न॒श्रुन्नो॑ रुद्रे॒ह बो॑धि बृ॒हद् व॑देम वि॒दथे॑ सु॒वीरा॑ः ॥१५॥

पूरा अध्याय