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ऋग्वेद 30.3

ऊ॒र्ध्वो ह्यस्था॒दध्य॒न्तरि॒क्षे ऽधा॑ वृ॒त्राय॒ प्र व॒धं ज॑भार ।
मिहं॒ वसा॑न॒ उप॒ हीमदु॑द्रोत् ति॒ग्मायु॑धो अजय॒च्छत्रु॒मिन्द्र॑ः ॥३॥

पूरा अध्याय