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ऋग्वेद 93.5

उ॒त नो॒ नक्त॑म॒पां वृ॑षण्वसू॒ सूर्या॒मासा॒ सद॑नाय सध॒न्या॑ । सचा॒ यत्साद्ये॑षा॒महि॑र्बु॒ध्नेषु॑ बु॒ध्न्य॑ः ॥५॥

पूरा अध्याय