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ऋग्वेद 92.12

उ॒त स्य न॑ उ॒शिजा॑मुर्वि॒या क॒विरहि॑ः शृणोतु बु॒ध्न्यो॒३ हवी॑मनि ।
सूर्या॒मासा॑ वि॒चर॑न्ता दिवि॒क्षिता॑ धि॒या श॑मीनहुषी अ॒स्य बो॑धतम् ॥१२॥

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