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ऋग्वेद 89.11

प्राक्तुभ्य॒ इन्द्र॒ः प्र वृ॒धो अह॑भ्य॒ः प्रान्तरि॑क्षा॒त्प्र स॑मु॒द्रस्य॑ धा॒सेः ।
प्र वात॑स्य॒ प्रथ॑स॒ः प्र ज्मो अन्ता॒त्प्र सिन्धु॑भ्यो रिरिचे॒ प्र क्षि॒तिभ्य॑ः ॥११॥

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